चुनाव की चर्चा के साथ ही राजनीतिक दल कर रहे हैं वादे और ग्रामीण बता रहे हैं समस्याएं
कुछ ग्राम पंचायतों को छोड़ दिया जाए, तो अन्य पंचायतों और उनके अधीन आने वाले गांवों में सड़कों के अभाव में स्कूल जाने वाले विद्यार्थियों से लेकर गुजरने वाले लोग परेशान हैं। नालियों के अभाव में सालभर सड़कों पर कीचड़ और गंदगी के बीच से लोगों को निकलना पड़ता है। पंचायतों के कार्यकाल के पांच साल में भी अधिकांश गांव इन मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे हैं। हालात यह हैं कि हैंडपंप के आसपास भी गंदगी के अंबार के कारण लोगों को परेशानी झेलनी पड़ती है।
चुनाव के लिए दावों में यह
पंचायत चुनाव के लिए गांवों के सर्वांगीण विकास के वादे किए जा रहे हैं। इनमें सड़क बनवाने, स्कूल की मरम्मत, नालियों के निर्माण अतिक्रमण हटाने जैसे मुद्दे प्रमुख हैं। हकीकत यह है कि गांवों में स्कूलों की बिल्डिंग जरा सी बारिश में ही टपकने लगती हैं। परिसर में महीनों तक पानी भर जाता है। सड़कों की हालत ठीक नहीं है। जिला मुख्यालय के समीप गांवों की सड़कें बारिश के दिनों में बुरी तरह उखड़ गई थीं। उसकी अभी तक मरम्मत नहीं हो सकी है। इधर, चुनाव की आचार संहिता के कारण कई मंजूर काम शुरू नहीं हो सके।
गांव की नई सरकार से रहेगी उम्मीद
पंचायत चुनाव के बाद गठित होने वाली गांव की नई सरकार से ग्रामीणों को खासी उम्मीदें हैं। इस बार शैक्षणिक योग्यता के बंधन के कारण कई युवा सरपंच की उम्मीदवारी कर रहे हैं। इनमें से 50 फीसदी पढ़ी-लिखी महिलाएं भी गांव की सरकार का हिस्सा होंगी। इससे उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले सालों में गांव की नई सरकार के नुमाइंदे विकास को प्राथमिकता देंगे। प्रस्ताव तो हर बार बनते हैं, लेकिन अब इस चुनाव के बाद होने वाले कामों पर निगाह रहेगी।
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