Friday, 27 March 2015

जाटों को मोदी का भरोसा

आरक्षण के मुद्दे पर संविधान के दायरे में करेंगे मदद



नई दिल्ली / सुप्रीम कोर्ट से खारिज जाट आरक्षण पर सरकार सधे कदम से आगे बढ़ेगी। इस मुद्दे की संवेदनशीलता को देखते हुए मशविरा भी होगा और समीक्षा के लिए कोशिश भी। लेकिन यह ध्यान रखते हुए कि किसी भी स्तर पर संवैधानिक सीमा का उल्लंघन न हो। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जाट नेताओं के शिष्टमंडल को इसका संकेत दे दिया है, जबकि भाजपा की ओर से जल्द ही चर्चा के लिए समिति गठित हो सकती है। संभव है कि केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली के नेतृत्व में पूरे मुद्दे की समीक्षा हो।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले की यूं तो सरकार पर कोई आंच नहीं पड़ी है लेकिन वह और भाजपा कुछ करती दिखना चाहती है। यही कारण है कि प्रधानमंत्री ने जाट नेताओं को संवैधानिक ढांचे के भीतर समाधान तलाशने का आश्वासन दे दिया। शिष्टमंडल भाजपा अध्यक्ष अमित शाह से भी मिला। उन्होंने भी समीक्षा व मदद का भरोसा दिलाया। बताते हैं कि भाजपा की समिति भी बन सकती है। जेटली इसका कोई कानूनी रास्ता निकालने की कोशिश कर सकते हैं। जाट समुदाय की ओर से सुप्रीम कोर्ट में समीक्षा के लिए याचिका दी जाएगी और सरकार इस पर सहमति जता सकती है। खासकर उन मामलों में रियायत का आग्रह होगा जो कोर्ट के फैसले के कारण अटक गए हैं। शिष्टमंडल का कहना था कि कई जाट परीक्षार्थी कोटे के तहत परीक्षा दे चुके है, कइयों ने नौकरियों के लिए आवेदन किया है। सिविल सर्विस की मुख्य परीक्षा में कुछ जाट परीक्षार्थी कोटे से चुनकर आ सकते हैं। फैसला तुरंत लागू हुआ तो उनका भविष्य खतरे में पड़ जाएगा। लिहाजा सरकार को कोई कदम उठाना चाहिए।



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