Thursday, 9 April 2015

खेमका के बाद राजस्थान में ईमानदार अफसर सस्पेंड?

बाड़मेर / भूमाफिओं में भी आयुक्त का खौफ नजर आने लगा। ईमानदार अफसर ने किसी भी नेता की नहीं सुनी थी और शहर के मुख्य बाजार को अतिक्रमण मुक्त करवा दिया था। रसूखदार लोगों के यहां अतिक्रमण तोड़ दिया था। इस पूरे मामले में भाजपा नेताओं ने कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया है वहीं सरकार के इस फैसले का बाड़मेर शहर के लोगो में जबरदस्त गुसा नजर आ रहा है।

आयुक्त ने करीब छह महीने पहले ही कार्यभार संभाला था। उनके बाद शहर की सड़कें खुली हो गईं। ज्वाइन करने के बाद पहला काम अपने दफ्तर से शुरू किया था जहां नगर परिषद में कर्मचारी ड्यूटी के प्रति गंभीर नहीं थे, उन्हें सबक सिखाया। प्रतिबंधित पॉलीथिन को लेकर अब तक प्रशासन ने कार्रवाई नहीं की, लेकिन आयुक्त ने पांच साल के बाद इस मामले में कार्रवाई की। गुजरात से आ रहे प्लास्टिक को जब्त किया गया। अब तक करीब डेढ़ टन से ज्यादा पॉलिथीन जब्त की गई थी।

इसके बावजूद सरकार के एक आदेश पर उन्हें सस्पेंड कर दिया गया। सस्पेंड करने को लेकर भी संदेह बना हुआ है कि आखिर उन्हें हटाया क्यों गया है। एक तरफ संयुक्त शासन सचिव पुरुषोत्तम बियानी का कहना है कि कलेक्टर की शिकायत पर उन्हें हटाया है। जबकि कलेक्टर का कहना है कि उन्होंने आयुक्त को हटाने के लिए ऐसी कोई सिफारिश नहीं की है।

हरियाणा सरकार के ईमानदार आईएएस अफसर अशोक खेमका के तबादले के बाद अब राजस्थान भाजपा सरकार ने एक ईमानदार अधिकारी धर्मपाल जाट को सस्पेंड कर दिया है।

गौरतलब है कि राजस्थान के बाड़मेर के नगर परिषद आयुक्त जाट ने एक सप्ताह तक रातभर कार्रवाई कर वर्षों पुराने अतिक्रमण को हटाया था।

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