सीतोडाई में आयोजित राजस्व लोक अदालत
65 वर्षीय बढड के लिए रहा उपयोगी
जैसलमेर / राज्य सरकार द्वारा जिले में चल रहें राजस्व लोक अदालत अभियान कई मायने में बहुत ही कारगर सिद्व हो रहे है। इन शिविरों में जहां राजस्व प्रकरणों का निस्तारण हो रहा है वहीं वर्षों बाद कहीं लोगों को उनकी पैतृक भूमि का भी हक मिल रहा है। इन कैंपों में किए जाने वाले कार्यों के तत्कालिक निर्णय एवं उसके फलस्वरूप काश्तकारों को मिलने वाले लाभ नये आयाम के रूप में स्थापित हो रहे है।
उपखंड फतेहगढ क्षेत्र में बुधवार को ग्राम पंचायत मुख्यालय पर राजस्व लोक अदालत अभियान शिविर का आयोजन उपखंड अधिकारी जयसिंह की अध्यक्षता में हुआ जिसमे ग्राम पंचायत सीतोडाई के साथ ही रामा व कपूरिया के काश्तकारों के राजस्व कार्यों का मौके पर निष्पादन किया गया। उल्लेखनीय है कि ग्राम रामा के गोविन्दलाल बढड को इस शिविर में 40 वर्ष बाद अपनी पैतृक भूमि का मालिकाना हक मिला। उसे लगभग 22 बीघा भूमि का शिविर प्रभारी जयसिंह द्वारा हक प्रदान किया गया एवं उसके नाम से राजस्व रिकाॅर्ड में अमल दरामद किया गया।
उल्लेखनीय है कि गोविन्दलाल बढड के पिता अचलदास का स्वर्गवास वर्ष 1972 में हो गया था। पिता के फौतेदगी पर भरे गए नामांतकरण में गोविन्दलाल बढड व उसके चार भाईयो का नाम चल रहा था। जो हाल बंदोबश्त की पहली जमाबंदी में किसी कारण संवत 2032-35 में हट गया। इस प्रकार वादी गोविन्दलाल का नाम चालू बंदोबश्त में उनकी पैतृक संपति से बिना किसी कारण से नहीं दर्ज हुआ। प्रार्थी गोविन्दलाल को इसकी जानकारी हुई तो उसके होश उड गए एवं उसने अपना नाम पैतृक भूमि में चालू बंदोबश्त में दर्ज करवाने के लिए काफी प्रयास किए लेकिन उसके प्रयासों की सफलता नही मिली।
गोविन्दलाल बढड ने थक हारकर उसने अपने भाईयों के विरूद्व सहायक कलेक्टर एवं उपखंड अधिकारी फतेहगढ के समक्ष अपना दावा प्रस्तुत किया। राजस्व लोक अदालत का आयोजन जब सीतोडाई ग्राम पंचायत मुख्यालय पर हुआ तो उस समय गोविन्दलाल बढड भी उपखंड अधिकारी के समक्ष पेश हुए एवं उन्हें न्याय दिलाने व पैतृक भूमि में हक दिलाने की मांग की। उपखंड अधिकारी फतेहगढ जयसिंह ने वास्तव में बढड की वाजिब मांग के साथ ही मानवीय भावनाओं की संवेदनशीलता दिखाते हुए राज्य सरकार द्वारा दिए गए अधिकारों, धारा 88, 53 एवं 188 राजस्थान काश्तकारी अधिनियम 1955 के तहत प्रदत शक्तियों का प्रयोग करते हुए स्व. अचलदास बढड के पुत्र गोविन्दलाल बढड के नाम उसकी पैतृक भूमि में उसके भाईयो के साथ दर्ज करने के मौके पर ही आदेश जारी किए। इसके साथ ही इसका नाम राजस्व रिकाॅर्ड में भी अमल दरामद कराने के निर्देश दिए।
इस प्रकार राजस्व लोक अदालत शिविर में 65 वर्षीय गोविन्दलाल को पूरे 40 वर्ष बाद अपनी पैतृक भूमि का मालिकाना हक प्राप्त हुआ। इस प्रकार ग्राम पंचायत सीतोडाई का लोक अदालत शिविर रामा निवासी गोविन्दलाल बढड के लिए तो जैसे कोई भूमि का सौगात लेकर आया। 65 वर्षीय गोविन्दलाल ने इस प्रकार की लोक अदालत से जो न्याय प्राप्त किया है उसके लिए उसने शिविर प्रभारी एवं राज्य सरकार के प्रति हार्दिक आभार जताया एवं कहा कि वास्तव में यह शिविर जरूरतमंद लोगो के लिए बहुत ही उपयोगी साबित हो रहे है।
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