मुख्यमंत्री ने की थी पूछताछ
उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो जब तोमर की फर्जी डिग्री का मामला मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाया गया तो उन्होंने इस संबंध में पूछताछ की थी। तोमर ने उन्हें यही बताया था कि सियासी रंजिश के कारण विरोधी साजिश रच रहे हैं। तब मुख्यमंत्री ने उन पर भरोसा किया और दबाव के बावजूद तोमर को मंत्रिमंडल से हटाने से इन्कार कर दिया। उन्हें भरोसा था कि तोमर सच्चे साबित होंगे। मगर उनकी गिरफ्तारी के बाद सामने आ रही हकीकत ने केजरीवाल को अपने विचार बदलने पर विवश कर दिया है। इसके बाद ही तोमर को मंत्रिमंडल से निकालने का फैसला किया गया। सूत्र बताते हैं कि जब तोमर की फर्जी डिग्री की बात सामने आई तो उन्होंने एक आरटीआइ का जवाब मुख्यमंत्री के सामने पेश कर उन्हें यकीन दिलाने की कोशिश की थी कि असल में उनकी डिग्रियां फर्जी नहीं हैं। अब उस आरटीआइ के भी फर्जी साबित हो जाने के बाद पूर्व कानून मंत्री का गैर कानूनी चेहरा केजरीवाल के सामने भी स्पष्ट हो चुका है। यही वजह है कि वह अब उन्हें अपने करीब नहीं देखना चाहते।
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