निकाय चुनाव
जैसलमेर / जिले में निकाय चुनाव भाजपा और कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा का बड़ा सवाल बन गए है। इस चुनाव में दोनों दलों में से कोई भी जरा सी चूक नहीं चाहता। यही कारण है कि शायद पहली बार नामांकन के आखिरी दिन भी प्रत्याशियों सिम्बल देते नजर आए। हालांकि सोमवार देर रात तक पर्दे के पीछे इशारों की राजनीति चलती रही और जिसे टिकट देना था, उसे फोन पर सूचना दे दी गई और अंत में भी आधिकारिक तौर पर भाजपा ने सूची जारी नहीं की और न ही कांग्रेस ने अपने शेष उम्मीदवारों के पते खोले। जबकि कई दावेदार अपनी पार्टी से अधिकृत सूची का इंतजार करते रहे।
दरअसल, निकाय में इस समय कांग्रेस का कब्जा है। भाजपा जहां इन्हें हथियाना चाहती है वहीं कांग्रेस इन्हें गंवाना नहीं चाहती। दोनों पार्टियां इस बात को भी भलीभांति जानती हैं कि जरा सी चूक उन्हें भारी पड़ सकती है। इसलिए सोची समझी रणनीति के तहत मंगलवार को, नामांकन के अंमित समय तक कांग्रेस और भाजपा ने अपने चहेतों के फार्म भरवाये ।
कांग्रेस ने अपनी आधी सूची के लिये भाजपा की सूची का इंतजार किया ताकि उसी के अनुरूप नीति बनाई जा सके। खासकर उन वार्डों में जो आरक्षित हैं। ताकि भाजपा को जोरदार ढंग से घेरा जा सके। पार्टी की ओर से अंतिम समय में वार्ड नंबर 8 से शांति चूरा को फाॅर्म भरवाया । शांति चूरा वर्तमान में वार्ड नंबर 7 से कांग्रेस की टिकट से पार्षद है ।
भाजपा में कई गुट हैं। हर कोई अपने आदमी को टिकट दिलाना चाहता है। स्थिति यह रही कि एन वक्त पर प्रत्याषियों के नामों की घोषणा करनी पड़ी। पार्टी विधायक और भाजपा जिलाध्यक्ष के समक्ष कार्यकर्ताओं ने विरोध जताया। पार्टी में गुटबाजी इस कदर हावी है कि एक दूसरे को हराने के लिए प्रत्याशी खड़े किये गये हैं। कई दावेदारों को फोन कर फॉर्म भरने के लिए कहा गया। इससे भी बगावत के सुर बढ़ रहे हैं।
निकाय बना प्रतिष्ठा का सवाल, जीत के लिए एक-एक वार्ड पर फोकस, दोनों ही दलों को बगावत का डर
टिकट का सियासी गणित और क्यों बिना घोषणा के ही फॉर्म भरे दावेदारों ने
जैसलमेर / जिले में निकाय चुनाव भाजपा और कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा का बड़ा सवाल बन गए है। इस चुनाव में दोनों दलों में से कोई भी जरा सी चूक नहीं चाहता। यही कारण है कि शायद पहली बार नामांकन के आखिरी दिन भी प्रत्याशियों सिम्बल देते नजर आए। हालांकि सोमवार देर रात तक पर्दे के पीछे इशारों की राजनीति चलती रही और जिसे टिकट देना था, उसे फोन पर सूचना दे दी गई और अंत में भी आधिकारिक तौर पर भाजपा ने सूची जारी नहीं की और न ही कांग्रेस ने अपने शेष उम्मीदवारों के पते खोले। जबकि कई दावेदार अपनी पार्टी से अधिकृत सूची का इंतजार करते रहे।
दरअसल, निकाय में इस समय कांग्रेस का कब्जा है। भाजपा जहां इन्हें हथियाना चाहती है वहीं कांग्रेस इन्हें गंवाना नहीं चाहती। दोनों पार्टियां इस बात को भी भलीभांति जानती हैं कि जरा सी चूक उन्हें भारी पड़ सकती है। इसलिए सोची समझी रणनीति के तहत मंगलवार को, नामांकन के अंमित समय तक कांग्रेस और भाजपा ने अपने चहेतों के फार्म भरवाये ।
कांग्रेस ने अपनी आधी सूची के लिये भाजपा की सूची का इंतजार किया ताकि उसी के अनुरूप नीति बनाई जा सके। खासकर उन वार्डों में जो आरक्षित हैं। ताकि भाजपा को जोरदार ढंग से घेरा जा सके। पार्टी की ओर से अंतिम समय में वार्ड नंबर 8 से शांति चूरा को फाॅर्म भरवाया । शांति चूरा वर्तमान में वार्ड नंबर 7 से कांग्रेस की टिकट से पार्षद है ।
भाजपा में कई गुट हैं। हर कोई अपने आदमी को टिकट दिलाना चाहता है। स्थिति यह रही कि एन वक्त पर प्रत्याषियों के नामों की घोषणा करनी पड़ी। पार्टी विधायक और भाजपा जिलाध्यक्ष के समक्ष कार्यकर्ताओं ने विरोध जताया। पार्टी में गुटबाजी इस कदर हावी है कि एक दूसरे को हराने के लिए प्रत्याशी खड़े किये गये हैं। कई दावेदारों को फोन कर फॉर्म भरने के लिए कहा गया। इससे भी बगावत के सुर बढ़ रहे हैं।
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