Monday, 16 March 2015

डाक सेवकों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के चलते चरमराई डाक व्यवस्था

न पेंशन बंट रही और न ही पहुंच रही पाती, वैकल्पिक इंतजाम भी बेकार



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जैसलमेर / 6 सूत्रीय मांगों को लेकर जिले में 10 मार्च से चल रही ग्रामीण डाक सेवकों की अनिश्चित कालीन हड़ताल अब भी जारी है। इससे गांवों में डाक सेवा बुरी तरह प्रभावित हो गई हैं। शहरी डाक घरों में गांव में बंटने वाले हजारों लिफाफे और पार्सल इकट्ठा हो गए हैं। सरकारी योजनाओं की राशि व दस्तावेज भी समय से नहीं पहुंच रहे। विभाग द्वारा किया गया वैकल्पिक व्यवस्थाओं का दावा भी सही नजर नहीं आ रहा। ग्रामीण इलाकों में पेंशन, लाइट बिल जमा करने में, टिकट, रजिस्ट्री आदि कामों में ग्रामीणों को परेशानियां आ रही हैं। वृद्धावस्था, सामाजिक सुरक्षा व विकलांग पेंशन आदि का वितरण नहीं हो पा रही। वहीं मनरेगा सहित दूसरी योजनाओं के भुगतान भी पेंडिंग पड़े हैं। अल्प बचत सहित दूसरी योजनाओं की किश्तें भी इन डाकघरों में जमा नहीं हो पा रहीं।

मुख्य डाक अधीक्षक के अनुसार ग्रामीण डाक सेवकों की हड़ताल से जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में डाक वितरण में दिक्कत आ रही है। उपलब्ध संसाधनों व कर्मचारियों के जरिए हम वैकल्पिक व्यवस्था बना रहे हैं। वहीं कैश जमा कराने के लिए शहरी डाक घरों में व्यवस्था की गई है। हालांकि मुख्य डाक अधीक्षक ने डाक वितरण व दूसरे कामों के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं करने की बात कही, लेकिन स्टाफ न होने से यह दाबा खोखला नजर आ रहा है।

बीमा योजना लागू करने की मांग

ग्रामीण डाकसेवकों के लिए बनी न्यायाधीश कमेटी के समझौते पर अमल करने, ग्रामीण डाकसेवकों का विभागीकरण कर स्थाई कर्मचारियों की तरह सुविधाएं देने की मुख्य मांगें हैं। उनकी यह भी मांगे हैं कि, पोस्टमेन, एमटीएस की नियुक्ति नियमों को बंद कर सन् 1989 के नियुक्ति नियमों की तरह लागू किया जाए। ग्रामीण डाकसेवकों की अनुकंपा नियुक्ति में लाए पाइंट सिस्टम को बंद किया जाए। कैश कन्वेंस का अलाउंस बढाय़ा जाए और नकदी की रकम 20 हजार से घटाकर 5 हजार की जाए। बीमा योजना को जल्दी लागू किया जाए।
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