न पेंशन बंट रही और न ही पहुंच रही पाती, वैकल्पिक इंतजाम भी बेकार
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मुख्य डाक अधीक्षक के अनुसार ग्रामीण डाक सेवकों की हड़ताल से जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में डाक वितरण में दिक्कत आ रही है। उपलब्ध संसाधनों व कर्मचारियों के जरिए हम वैकल्पिक व्यवस्था बना रहे हैं। वहीं कैश जमा कराने के लिए शहरी डाक घरों में व्यवस्था की गई है। हालांकि मुख्य डाक अधीक्षक ने डाक वितरण व दूसरे कामों के लिए वैकल्पिक व्यवस्थाएं करने की बात कही, लेकिन स्टाफ न होने से यह दाबा खोखला नजर आ रहा है।
बीमा योजना लागू करने की मांग
ग्रामीण डाकसेवकों के लिए बनी न्यायाधीश कमेटी के समझौते पर अमल करने, ग्रामीण डाकसेवकों का विभागीकरण कर स्थाई कर्मचारियों की तरह सुविधाएं देने की मुख्य मांगें हैं। उनकी यह भी मांगे हैं कि, पोस्टमेन, एमटीएस की नियुक्ति नियमों को बंद कर सन् 1989 के नियुक्ति नियमों की तरह लागू किया जाए। ग्रामीण डाकसेवकों की अनुकंपा नियुक्ति में लाए पाइंट सिस्टम को बंद किया जाए। कैश कन्वेंस का अलाउंस बढाय़ा जाए और नकदी की रकम 20 हजार से घटाकर 5 हजार की जाए। बीमा योजना को जल्दी लागू किया जाए।

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