Tuesday, 28 April 2015

लू-तापघात से बचने के उपाय बताए

जैसलमेर । वर्तमान में गर्मी का मौसम प्रारम्भ हो रहा है अधिक गर्मी के कारण लू-तापघात के रोगी होने की आशंका बढ जाती है इसके लिए लू-तापघात रोग के लक्षण, बचाव के उपाय एवं उपचार इस प्रकार से करावें। प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. डी.डी. खींची ने बताया कि लू-तापघात के लक्षण ये है जिसमें सिर का भारीपन व सरदर्द, अधिक प्यास लगना, शरीर में भारीपन के साथ थकावट, जी मिचलना, सिर चकराना, शरीर का तापमान बढना, शरीर का तापमान अत्यधिक (105 एफ या अधिक) हो जाना, पसीना आना बंद होना, मुंह का लाल हो जाना, त्वचा का सूखा होना एवं बेहोस होना इत्यादि शामिल है।

उन्होंने बताया कि लू-तापघात के बचाव के लिए ये उपाय करें जिसमें लू-तापघात से प्रायः कुपोषित बच्चे, वृद्व, गर्भवती महिलाएं, श्रमिक आदि शीघ्र प्रभावित हो सकते है इन्हें प्रायः 10 बजे से सायं 6 बजे तक तेज गर्मी से बचाने के लिए छायादार ठंडे स्थान पर रहने के लिए रखने का प्रयास करें, तेज धूप में निकलना आवष्यक हो तो ताजा भोजन करके उचित मात्रा में ठंडे जल का सेवन करके बाहर निकलें, थोडे अंतराल के पष्चात् ठंडे पानी, शीतल पेय, छाछ, ताजा फलों के रस का सेवन करें, तेज धूप में बाहर निकलते हुए छाते का उपयोग करें या कपडे से सिर या बदन को ढककर रखें तथा अकाल राहत कार्याें पर अथवा श्रमिकों के कार्यस्थल पर छाया एवं पानी का पूर्ण प्रबंध रखें ताकि श्रमिक थोडी-थोडी देर में छायादार स्थानों पर विश्राम कर सकें।

उन्होंने बताया कि लू-तापघात के उपचार ये है जिसमें लू-तापघात से प्रभावित रोगी को तुरंत छायादार ठंडे स्थान पर लिटा दें, रोगी की त्वचा को गीले कपडे से स्पंज करते रहे, रोगी के कपडो को ढीला कर दें, रोगी होष में हो तो उसे ठंडा पेय पदार्थ देवें तथा रोगी को तत्काल नजदीक के चिकित्सालय में उपचार के लिए ले जावें इत्यादि उपचार शामिल है।

प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. डी.डी. खींची ने बताया कि श्री जवाहिर चिकित्सालय में लू-तापघात से बचाव एवं उपचार के लिए ये सुविधाएं उपलब्ध है जिसमें चिकित्सालय में मेडिकल वार्ड में दो-चार बैड लू - तापघात के रोगियों के उपचार के लिए आरक्षित रखे गए है, वार्ड को कूलर एवं पंखों से ठंडा रखा गया है, मरीज तथा उसके परिजनों के लिए शुद्व व ठंडे पेयजल की व्यवस्था है, चिकित्सालय में रोगी के उपचार के लिए आपातकालीन किट तैयार रखा गया है तथा चिकित्सक एवं नर्सिंग स्टाफ को इस दौरान ड्यूटी के प्रति पाबंद किया गया है।

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