Sunday, 19 April 2015

बाल विवाह रोकने को ग्राम पंचायतें आगे आएं : जस्टिस व्यास

जोधपुर। बाल विवाह की रोकथाम के लिए ग्राम पंचायतें प्रस्ताव पारित कर निर्णय करें और संकल्प के साथ 18 वर्ष की बालिका व 21 वर्ष के बालक का ही विवाह सुनिश्चित किया जाए। यह बात राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश व हाईकोर्ट विधिक सहायता समिति जोधपुर के अध्यक्ष जस्टिस गोपालकृष्ण व्यास ने कही।

जस्टिस व्यास बाल विवाह की रोकथाम के लिए जालेली नायला गांव में देव रामेश्वर पब्लिक स्कूल में विधिक जागरूकता कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।

राजस्थानी भाष्ाा में दिए संबोधन में जस्टिस व्यास ने कहा कि बाल विवाह की रोकथाम के लिए कानून व विधिसम्मत कार्रवाई व प्रावधान तो है ही, इसमें पंच-सरपंच एवं ग्रामवासी मिलकर गांव में ऎसा प्रस्ताव पारित कर दें ताकि बाल विवाह की रोकथाम में न तो कोई समस्या हो और न ही कानून के तहत दण्डनीय कार्रवाई हो।

जिला एवं सत्र न्यायाधीश रामसिंह मीणा ने बाल विवाह को कुप्रथा व सामाजिक बुराई बताते हुए कहा कि इसकी रोकथाम के लिए जागरूकता के साथ जन सहभागिता जरूरी है। राजस्थान उच्च न्यायालय विधिक सेवा समिति जोधपुर के उप सचिव दलपतसिंह ने विधिक जागरूकता कार्यक्रम की जानकारी दी। कार्यक्रम में न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता सहित ग्राम वासी उपस्थित थे। सरपंच सोहनलाल चौधरी ने आभार जताया व कार्यक्रम संचालन सुमेरसिंह राजपुरोहित ने किया।

संकल्प दिलाया

कार्यक्रम में जस्टिस व्यास ने बाल विवाह की रोकथाम के लिए ग्रामीणों को संकल्प दिलाया व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से जारी पोस्टर का विमोचन किया।

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