बारहठ बंधुओं की जीवनी पढेंगे छात्र
- आनन्द एम. वासु -
जैसलमेर। भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूत के रूप में पहचाने जाने वाले वाले बारहठ बंधुओं की जीवनी के बारे में विद्यार्थियों को अवगत कराया जाएगा। सरकार ने हाल ही इन महान ऋांतिकारियों की जीवनी एवं स्वतंत्रता आंदोलन में बारहठ बंधुओं द्वारा निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका आदि को लेकर पाठ्यऋम में विशेष पाठ सम्मिलित किए हैं। बारहठ बंधुओं के शौर्य, वीरता इतिहास को आठवीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में शामिल किया गया है। पाठ्य पुस्तक के अध्याय 21 में राष्ट्रीय आंदोलन में यह इतिहास पढाया जाएगा। बारहठ बंधुओं के साथ ही इस अध्याय में हेमू कालाणी एवं वीर विनायक दामोदर सावरकर के बारे में भी विवरण शामिल किया गया है।
बारहठ बंधुओं का इतिहास
1903 में महाराणा फतह सिंह दिल्ली में लार्ड कर्जन के दरबार में जाने लगे तो देवखेडा (शाहपुरा) के तत्कालीन जागीरदार केसरी सिंह बारहठ ने महाराणा को 13 सोरठे *चेतावणी रा चुंगट्यां* भेजे। इस पर केसरी सिंह पर राजद्रोह, बगावत, ब्रिटिश फौज के विरुद्घ भडकाने के आरोप लगाया। आजादी की लडाई के दौरान केसरीसिंह बारहठ तत्कालीन राजपूताना में सशस्त्र ऋांति के प्रणेता भी थे। इनके छोटे भाई जोरावर सिंह बारहठ ने 13 दिसंबर 1912 को चांदनी चौक में लार्ड होर्डिंग पर बम फेंका। वहीं केसरी सिंह के बेटे प्रताप सिंह आजादी के आंदोलन में बरेली जेल में शहीद हुए। वर्ष 1857 की ऋांति के बाद देश की आजादी के आंदोलन में राजपूताना की तरफ से शहादत देने वाले ये पहले ऋांतिकारी थे।
— राज्य सरकार द्वारा इस सत्र से पाठ्यऋम में जोडे गए अध्याय की अतिरिक्त संपूरक विषय वस्तु पहुंच गई है। इसमें आठवीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान में बारहठ बंधुओं के पाठ भी शामिल हैं। शोभारानी परिहार, प्रबंधक, राजस्थान राज्य पाठ्य पुस्तक मंडल
No comments:
Post a Comment