बेंगलूरू / कर्नाटक में आयोजित होने जा रहे एक बैडमिंटन टूर्नामेंट ने सोशल मीडिया पर इन दिनों बवाल मचा रखा है। इस टूर्नामेंट का नाम तो ओपन टूर्नामेंट है जबकि इसमें केवल ब्राह्मणों की एक उपजाति को ही शामिल होने की अनुमति दी है। टूर्नामेंट के आयोजकों का कहना है कि यह समुदाय के लोगों के इकट्ठा होने का जरिया है और खेलों में युवाओं को भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करने की एक पहल है।
टूर्नामेंट आयोजक दैवज्ञ फाउंडेशन के अध्यक्ष श्रीनिवास कुडतकर ने कहा, 20-21 जून को होने वाले इवेंट्स को सिर्फ दैवज्ञ ब्राह्मणों के लिए रखा गया है। हमारा उद्देश्य संभ्रांतवादी होने का नहीं है बल्कि हमारे समुदाय से उभरती हुई प्रतिभाओं की पहचान करना है। हम इन युवा शटलरों की सहायता करना चाहते हैं ताकि वे अपनी पहचान बना सकें। हमारे उद्देश्यों को गलत समझने का कोई सवाल ही नहीं है।
जब उनसे पूछा गया कि ओपन टूर्नामेंट का वास्तविक मतलब क्या है तो कुडतकर ने कहाकि यह टूर्नामेंट सिर्फ आयु वर्गो के लिए ओपन है। हमारे पास महिलाओं और पुरूषों के लिए सिर्फ दो कैटिगरी हैं, एक 30 साल से ऊपर और दूसरी 30 साल से कम की। वहीं कर्नाटक बैडमिंटन एसोसिएशन को भी इस पर कोई आपत्ति नहीं है। एसोसिएशन के मुताबिक अगर यह एक कम्युनिटी इवेंट है तो आयोजकों को इसे आयोजित करने का अधिकार है, लेकिन हम ऎसे इवेंट्स को मान्यता नहीं देंगे।
टूर्नामेंट आयोजक दैवज्ञ फाउंडेशन के अध्यक्ष श्रीनिवास कुडतकर ने कहा, 20-21 जून को होने वाले इवेंट्स को सिर्फ दैवज्ञ ब्राह्मणों के लिए रखा गया है। हमारा उद्देश्य संभ्रांतवादी होने का नहीं है बल्कि हमारे समुदाय से उभरती हुई प्रतिभाओं की पहचान करना है। हम इन युवा शटलरों की सहायता करना चाहते हैं ताकि वे अपनी पहचान बना सकें। हमारे उद्देश्यों को गलत समझने का कोई सवाल ही नहीं है।
जब उनसे पूछा गया कि ओपन टूर्नामेंट का वास्तविक मतलब क्या है तो कुडतकर ने कहाकि यह टूर्नामेंट सिर्फ आयु वर्गो के लिए ओपन है। हमारे पास महिलाओं और पुरूषों के लिए सिर्फ दो कैटिगरी हैं, एक 30 साल से ऊपर और दूसरी 30 साल से कम की। वहीं कर्नाटक बैडमिंटन एसोसिएशन को भी इस पर कोई आपत्ति नहीं है। एसोसिएशन के मुताबिक अगर यह एक कम्युनिटी इवेंट है तो आयोजकों को इसे आयोजित करने का अधिकार है, लेकिन हम ऎसे इवेंट्स को मान्यता नहीं देंगे।
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