राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को और अब गृहमंत्री गुलाबचन्द कटारिया को भी स्वाइन फ्लू
जैसलमेर / राजस्थानी में एक कहावत है, 'लातों के भूत बातों से नहीं मानते ।' इसका मतलब यह कि 'गंभीर एक्शन पर गंभीर रिएक्शन ।' इसी कहावत को चरितार्थ कर रहा है स्वाइन फ्लू । प्रदेश में पिछले 30 दिनों में 38 लोग स्वाइन फ्लू का शिकार बन चुके हैं। यह आंकाड़ा अस्पतालों में इस जानलेवा बीमारी से निपटने के लिए किए गए इंतजाम की नाकामी बताने के लिए काफी है। परन्तु सरकार को सही नहीं लगे यह आंकड़े । आमजन को मारती यह बीमारी बार—बार कहती रही कि, मुझे रोको, मुझे रोको लेकिन सरकार का चिकित्सा विभाग मौन रहा । नजीतजन निजी क्लिनिक्स के वारे न्यारै हो गये । लेकिन अब जब इस बीमारी ने अपना शिकार वीआईपीज को किया तो सरकार हरकर में आई । राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को स्वाइन फ्लू हुआ । अब राज्य के गृहमंत्री गुलाबचन्द कटारियो को भी स्वाइन फ्लू हो गया तब जाकर सरकार जागी । स्कूलों में प्रार्थना सभाओं पर रोक लगाई गई । जागरूकता के लिये प्रचार—प्रसार के निर्देश जारी किए । प्रत्येक वार्ड में नियमित सफाई के निर्देश भी जारी हुए । चिकित्सा विभाग के स्टाफ की छुट्टियां रद्द कर दी गयी ।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के विशेषज्ञों के मुताबिक स्वाइन फ्लू से पीड़ित मरीजों के परिजनों को भी हाई रिस्क श्रेणी में रखा जाना चाहिए और उन्हें भी इससे बचाव की वैक्सीन दी जानी चाहिए, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। स्वाइन फ्लू के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रलय ने विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम भेजी, मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने दो बार मंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक कर आवश्यक निर्देश दिए, लेकिन अब तक व्यवस्था नहीं हो सकी। प्रदेश में 2014 में स्वाइन फ्लू से 34 लोगों की मौत हुई थी, लेकिन इस साल जनवरी माह में ही यह आंकड़ा 38 पहुंच चुका है।
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