बयानबाजी का सिलसिला न रुका तो मुफ्ती सरकार से बाहर आने का विकल्प खुला
नई दिल्ली / जम्मू-कश्मीर में मिली-जुली सरकार बनने के महज 24 घंटे के भीतर ही मुफ्ती मोहम्मद सईद और फिर अफजल गुरु के शव को सौंपने की पीडीपी विधायकों की मांग के साथ ही बीजेपी की मुसीबत बढ़ने लगी है। पार्टी के कई नेताओं का मानना है कि इस तरह की बयानबाजी से बीजेपी को नुकसान हो सकता है। अगर यह सिलसिला न रुका, तो पार्टी को सरकार से पीछे हटने को मजबूर होना पड़ सकता है। हालांकि पार्टी ये उम्मीद कर रही है कि दोनों दलों की कोऑर्डिनेशन कमिटी बनने के बाद बयानबाजी पर रोक लग सके। पार्टी की चिंता यह है कि बीजेपी के लिए देशभर में गलत संदेश जा रहे हैं।
जल्दी शुरू हुआ विवाद
पार्टी सूत्रों का कहना है कि यह आशंका पहले ही थी, क्योंकि पीडीपी और बीजेपी दोनों ही विपरीत धुरी पर टिकी पार्टियां हैं। लेकिन सरकार बनने के फौरन बाद इस तरह की बयानबाजी होगी, ऐसी किसी को उम्मीद नहीं थी। पार्टी नेताओं को लग रहा है कि देश के दूसरे हिस्सों में पार्टी को नुकसान हो सकता है। अब तक बीजेपी ही कांग्रेस पर आरोप अल्पसंख्यकों के तुष्टिकरण का आरोप लगाती रही है। पार्टी के एक नेता के मुताबिक हालांकि 6 माह बाद जब बिहार में चुनाव होंगे तब इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक बड़ी चिंता यह भी है कि आगे चलकर संघ क्या स्टैंड लेगा। संघ पहले भी इशारों में पीडीपी के साथ सरकार बनाने की कवायद का विरोध करता रहा है लेकिन ज्यादा से ज्यादा राज्यों में बीजेपी या उसके सहयोगी दलों की सरकार का रेकार्ड बनाने के क्रम में पार्टी ने जम्मू कश्मीर पर भी जोर दिया था। हालांकि पार्टी के महासचिव राममाधव का कहना है कि बीजेपी, पीडीपी नेताओं के इन बयानों से सहमत नहीं है लेकिन मिली जुली सरकार होने के कारण बीजेपी को खुद को इन बयानों से दूर करना आसान नहीं है।
खतरे और भी
पार्टी नेताओं को आशंका है कि आने वाले दिनों में पीडीपी आफस्पा और आर्टिकल 370 जैसे संवेदनशील मामलों को लेकर भी बीजेपी के लिए मुसीबत खड़ी कर सकती है। राहत सिर्फ इतनी है कि दोनों दलों में ये सहमति है कि कोर्डिनेशन कमिटी बने।
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