आपदा के लिहाज से जिला अस्पताल की तैयारी शून्य
जैसलमेर । स्वर्णनगरी के राजकीय अस्पताल श्रीजवाहर चिकित्सालय में भूकम्प या किसी दूसरी आपदा के तैयारियों के आकलन के लिए मॉक ड्रिल (तैयारी का पूर्वाभ्यास) होनी होती है । लेकिन स्वर्णनगरी के इस सरकारी अस्पताल में उसका अता-पता नहीं, जबकि मॉक ड्रिल के लिए सरकार की तरफ से अस्पताल प्रशासन को तैयार रहने के निर्देश जारी हो रखे हैं । आपदा राहत बाबत जिला अस्पताल प्रशासन द्वारा एक बैठक तक आयोजित नहीं की है । जबकि मॉक ड्रिल करके अपनी तैयारियों व कमियों का जायजा लिया जाने हेतु स्वास्थ्य विभाग के निर्देशानुसार बैठकें आयोजित करनी होती है । साथ ही, डॉक्टरों, कर्मचारियों, बिस्तरों, उपकरणों व दवाओं की कमी से जूझते अस्पताल सामान्या दिनों की भीड़ को ही नहीं संभाल पा रहा है तो किसी भीषण आपदा के हाल में क्या होगा, इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है ।इस जिले का दुर्भाग्य कहे या लापरवाही कि जिले में आपातकालीन सेवाएं देने वाला कोई नहीं है । जिले में सर्जन के कई पद रिक्त हैं । हड्डी रोग विशेषज्ञ भी नहीं है जिसके कारण फ ेक्चर की स्थिति में भी जोधपुर रैफ र कर दिया जाता है । किसी दुर्घटना में घायल हुए मरीज को सीधा जोधपुर रेैफ र कर दिया जाता है । यहां से जोधपुर की दूरी 285 किलोमीटर है । ऐसे में गंभीर घायल मरीज जोधपुर भी नहीं पहुंच पाते हैं । । आंकड़ो के अनुसार अप्रैल माह में हुई दस दुर्घटनाओं में १२ लोगों की मौत हुई है । 29 लोग घायल हुए जिन्हें जोधपुर रैफर किया गया । इनमें से एक की मौत जोधपुर ले जाते समय हो गई । डॉक्टर, स्टॉफ और संसाधनों के अभाव में घायलों को समय पर समुचित चिकित्सा सुविधाएं नहीं मिल पाती है । जिला मुख्यालय का सबसे बड़ा अस्पताल भी गंभीर दुर्घटनाओं में मात्र रैफ रल यूनिट बनकर रह जाता है । भूकम्प या बाढ़ जैसी कोई आपदा आ जाए तो जिले में त्राहि-त्राहि मच जाएगी ।
जिले के स्वास्थ्य महकमें में स्वीकृत पदों के 65 प्रतिशत पद रिक्त हैं । करोड़ों की लागत से बना ट्रोमा सेंटर बंद पड़ा है । मशीने धूल फ ांक रही है । सीटी स्के न मशीन भी है, लेकिन चिकित्सक नहीं है । चिकित्सक के अभाव में इसके उपयोगार्थ आवंटित बजट भी नाकारा पड़ा है । जिले की खस्ताहाल चिकित्सा व्यवस्था सुधारने के लिए इस शहर में आंदोलन भी हुए, जिस पर जनप्रतिनिधियों ने अपनी बात सरकार के सामने रखी, लेकिन राज्य सरकार ने स्वर्ण नगरी का दुख नहीं समझा जिले क ी चिकित्सा सुविधाओं में सुधार नहीं हुआ । जिले का सरकारी अस्पताल संसाधनों के अभाव से जूझ रहा है। चिकित्सा विभाग की अनदेखी से ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को भी चिकित्सा सुविधाओ का लाभ नहीं मिल पा रहा है। क्षेत्र की इस मामले में पूरी तरह उपेक्षा की जा रही है।
जिले में सरकारी अस्पताल को छोड़कर कहीं पर भी सर्जन नहीं है, जो दुर्घटना के घायलों का पर्याप्त उपचार कर सके । जवाहर चिकित्सालय में एक सर्जन है, पीएमओ डॉ० डीडी खींची । जो एक माह बाद रिटायर्ड होने वाले हैं ।
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