Tuesday, 5 May 2015

अब पीपीपी मोड पर जैसलमेर का मरू उत्सव

बीकानेर के ऊंट उत्सव में सजे-धजे ऊंट थिरकेंगे पीपीपी मोड पर


जैसलमेर । अब जैसलमेर का मरू उत्सव पीपीपी मोड पर आयोजित होगा । मरू महोत्सव फ रवरी माह में आयोजित होता है । देश विदेश में इसकी खासी पहचान है और सरकार को इससे विदेशी मुद्रा की भी आय होती है । पर्यटन विभाग के अनुसार अब से राज्य में मेले व उत्सव पीपीपी मोड पर आयोजित होंगे  इसका प्रारम्भिक प्रारूप तय होगा । आयोजित करने का काम अभी शुरूआती चरण में है। अंतिम रूप के लिए 5 मई को बैठक होगी। इसका उद्देश्य पीपीपी से राजस्थान की पहचान व आर्थिक संसाधनों को मजबूत करना है।

जनवरी में ऊंट उत्सव में बीकानेर के रेतीले धोरों और डॉ. करणीसिंह स्टेडियम परिसर में सजे-धजे ऊंट अब पीपीपी मोड पर थिरकेंगे। ऊंट उत्सव ही नहीं राज्य सरकार सभी लोक आयोजनों, मेलों व उत्सवों को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप(पीपीपी) या पूरी तरह निजी कम्पनियों से प्रायोजित कराने क ी तैयारी में है। इसके तहत पर्यटन विभाग के इन आयोजनों की जिम्मेदारी अब सरकारी व निजी क्षेत्र के उद्यमों, कॉरपोरेट हाउसेज, इवेंट मैनेजमेंट एजेंसीज आदि को दी जाएगी। वे नवाचारों से इन्हें विश्वस्तरीय बनाने का प्रयास करेंगे। पर्यटन निदेशालय ने इस बारे में निजी इंवेट कंपनियों से सुझाव व प्रस्ताव मांगे हैं। पर्यटन विभाग के इन आयोजनों को व्यावसायिक व राजस्व के लिहाज से आगे बढ़ा पाने के कारण यह कदम उठाया जा रहा है।

ये हैं सरकारी मेले व उत्सव

बीकानेर का ऊंट उत्सव, जैसलमेर का मरू उत्सव, माऊंट आबू का समर व विंटर फेस्टीवल, जयपुर का तीज, गणगौर फेस्टीवल व पतंगोत्सव, दौसा का आभानेरी फेस्टीवल, कोटा का दशहरा व एडवेंचर फेस्टीवल, जोधपुर का मारवाड़ फेस्टीवल, रणकपुर फेस्टीवल, पुष्कर मेला, झालावाड़ का चंद्रभागा मेला, बूंदी उत्सव, अलवर का मतस्य उत्सव, राजसमंद का कुंभलगढ़ उत्सव, नागौर मेला, डूंगरपुर का बेणेश्वर मेला, भरतपुर का बृज उत्सव, पाली का गोड़वाड़ उत्सव, उदयपुर का मेवाड़ महोत्सव तथा 24 से 30 मार्च तक राजस्थान दिवस पर उत्सव।




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